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तारीख क्या है?


पांच साल पुरानी सच्ची खबर, आज की एक झूठी खबर बन सकती है।

यह जाल क्यों है

यह इंटरनेट की सबसे कारगर तरकीबों में से एक है: कुछ बनाना नहीं, कुछ नकली करना नहीं। एक असली कंटेंट उठाओ — सालों पहले फ़िल्माई गई कोई बाढ़, कोई पुरानी हो चुकी चेतावनी, कोई पुराना बयान — और उसे आज बिना तारीख के फिर से पोस्ट कर दो। बाकी काम इमोशन कर देता है।

जाल दोहरा है: सच्चा पर पुराना कंटेंट झूठा बन सकता है (नियम बदल गया, प्रोडक्ट बाज़ार से हट गया, चेतावनी खत्म हो गई)… या फिर बिल्कुल वैसा ही सही भी रह सकता है। यह फ़ैसला तारीख से होता है — मैसेज कैसा दिखता है, उससे नहीं।

ज़रूरी कदम

आम जाल

“देखिए तट पर इस वक़्त क्या हो रहा है!” — वीडियो हैरान करने वाला है, आसमान काला है, लहरें बहुत बड़ी हैं। यही वीडियो सालों पहले आए एक तूफ़ान के वक़्त भी घूम चुका था। समुंदर सच्चा था — “इस वक़्त” झूठा था।

याद रखें

बिना तारीख के खबर हवा में तैरती है — और उससे कुछ भी कहलवाया जा सकता है।

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